हिन्दी साहित्य को सम्मानित करने की कोशिश में एक छोटा सा प्रयास, हिन्दी की श्रेठ कविताओं, ग़ज़लों, कहानियों एवं अन्य लेखों को एक स्थान पर संकलित करने की छोटी सी कोशिश...

Rahat Indori - Bulati Hai Magar Jane Ka Nai | राहत इन्दौरी - बुलाती है मगर जाने का नईं | Ghazal

राहत इन्दौरी की यह ग़ज़ल मुझे बेहद पसंद है, इसमें सो 'नई' शब्द का प्रयोग हुआ है उसका मतलब 'नया' नहीं, उसका मतलब 'नहीं' है क्योंकि कुछ सालो पहले ग़ज़ल में 'नहीं' का उच्चारण 'नई' होता था।  राहत साब ने इस ग़ज़ल में उसी उच्चारण का प्रयोग किया है, इसलिए आपसे आग्रह है इसको पढ़ते समय इसे 'नाई' करके पढे।  



 राहत इन्दौरी ग़ज़ल की 'बुलाती है मगर जाने का नईं' हिंदी लिपि में 

बुलाती है मगर जाने का नईं 
ये दुनिया है इधर जाने का नईं 

मेरे बेटे किसी से इश्क़ कर
मगर हद से गुजर जाने का नईं 

सितारें नोच कर ले जाऊँगा
मैं खाली हाथ घर जाने का नईं 

वबा फैली हुई है हर तरफ
अभी माहौल मर जाने का नईं 

वो गर्दन नापता है नाप ले
मगर जालिम से डर जाने का नईं

*************************************

Bulati Hai Magar Jaane Ka Naai Ghazal in Roman Transcript

Bulati Hai Magar Jaane Ka Naai
Yeh Duniya Hai Idhar Jaane Ka Naai

Mere Bete Kisi Se Ishq Kar
Magar Hadd Se Gujar Jaane Ka Naai

Sitare Noch Kar Le Jaunga
Mai Khaali Haath Ghar Jaane Ka Naai

Bawa Faili Huyi Hai Har Taraf
Abhi Mahaul Mar Jaane Ka Naai

Woh Gardan Naapta Hai Naap Le
Magar Zaalim Se Darr Jane Ka Naai


आशा है आपको रचना पसंद आई होगी, यदि हमारे ब्लॉग के लिए या इस रचना के सन्दर्भ में आपके कुछ विचार है तो हमें नीचे कमेंट बॉक्स में अवश्य बताये।  धन्यवाद !

Popular Posts

Rahat Indori - Bulati Hai Magar Jane Ka Nai | राहत इन्दौरी - बुलाती है मगर जाने का नईं | Ghazal

राहत इन्दौरी की यह ग़ज़ल मुझे बेहद पसंद है, इसमें सो 'नई' शब्द का प्रयोग हुआ है उसका मतलब 'नया' नहीं, उसका मतलब 'नहीं' है क्योंकि कुछ सालो पहले ग़ज़ल में 'नहीं' का उच्चारण 'नई' होता था।  राहत साब ने इस ग़ज़ल में उसी उच्चारण का प्रयोग किया है, इसलिए आपसे आग्रह है इसको पढ़ते समय इसे 'नाई' करके पढे।  



 राहत इन्दौरी ग़ज़ल की 'बुलाती है मगर जाने का नईं' हिंदी लिपि में 

बुलाती है मगर जाने का नईं 
ये दुनिया है इधर जाने का नईं 

मेरे बेटे किसी से इश्क़ कर
मगर हद से गुजर जाने का नईं 

सितारें नोच कर ले जाऊँगा
मैं खाली हाथ घर जाने का नईं 

वबा फैली हुई है हर तरफ
अभी माहौल मर जाने का नईं 

वो गर्दन नापता है नाप ले
मगर जालिम से डर जाने का नईं

*************************************

Bulati Hai Magar Jaane Ka Naai Ghazal in Roman Transcript

Bulati Hai Magar Jaane Ka Naai
Yeh Duniya Hai Idhar Jaane Ka Naai

Mere Bete Kisi Se Ishq Kar
Magar Hadd Se Gujar Jaane Ka Naai

Sitare Noch Kar Le Jaunga
Mai Khaali Haath Ghar Jaane Ka Naai

Bawa Faili Huyi Hai Har Taraf
Abhi Mahaul Mar Jaane Ka Naai

Woh Gardan Naapta Hai Naap Le
Magar Zaalim Se Darr Jane Ka Naai


आशा है आपको रचना पसंद आई होगी, यदि हमारे ब्लॉग के लिए या इस रचना के सन्दर्भ में आपके कुछ विचार है तो हमें नीचे कमेंट बॉक्स में अवश्य बताये।  धन्यवाद !

SHARE

Milan Tomic

Hi. I’m Designer of Blog Magic. I’m CEO/Founder of ThemeXpose. I’m Creative Art Director, Web Designer, UI/UX Designer, Interaction Designer, Industrial Designer, Web Developer, Business Enthusiast, StartUp Enthusiast, Speaker, Writer and Photographer. Inspired to make things looks better.

  • Image
  • Image
  • Image
  • Image
  • Image