हिन्दी साहित्य को सम्मानित करने की कोशिश में एक छोटा सा प्रयास, हिन्दी की श्रेठ कविताओं, ग़ज़लों, कहानियों एवं अन्य लेखों को एक स्थान पर संकलित करने की छोटी सी कोशिश...

Jaun Elia - Ajab Tha Uski Dilzari Ka Andaz | जॉन एलिया - अजब था उसकी दिलज़ारी का अन्दाज़ | Ghazal

"जॉन एलिया - अजब था उसकी दिलज़ारी का अन्दाज़" हिंदी लिपि में 


अजब था उसकी दिलज़ारी का अन्दाज़, वो बरसों बाद जब मुझ से मिला है
भला मैं पूछता उससे तो कैसे, मताए-जां तुम्हारा नाम क्या है?

साल-हा-साल और एक लम्हा, कोई भी तो न इनमें बल आया
खुद ही एक दर पे मैंने दस्तक दी, खुद ही लड़का सा मैं निकल आया

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