हिन्दी साहित्य को सम्मानित करने की कोशिश में एक छोटा सा प्रयास, हिन्दी की श्रेठ कविताओं, ग़ज़लों, कहानियों एवं अन्य लेखों को एक स्थान पर संकलित करने की छोटी सी कोशिश...

Firaq Gorakhpuri - Jo Baat Hai Hadd Se Badh Gayi Hai | फ़िराक़ गोरखपुरी - जो बात है हद से बढ़ गयी है | Ghazal

जो बात है हद से बढ़ गयी है
वाएज़(1) के भी कितनी चढ़ गई है

हम तो ये कहेंगे तेरी शोख़ी
दबने से कुछ और बढ़ गई है

हर शय ब-नसीमे-लम्से-नाज़ुक(2)
बर्गे-गुले-तर से बढ़ गयी है

जब-जब वो नज़र उठी मेरे सर
लाखों इल्ज़ाम मढ़ गयी है

Hullad Muradabadi - Mashkhara Mashoor Hai Aansoo Bahane Ke Liye | हुल्लड़ मुरादाबादी - मसखरा मशहूर है आँसू बहाने के लिए | Ghazal

मसखरा मशहूर है, आँसू बहानेके लिए
बाँटता है वो हँसी, सारे ज़माने के लिए

घाव सबको मत दिखाओ, लोग छिड़केंगे नमक
आएगा कोई नहीं मरहम लगाने के लिए

देखकर तेरी तरक्की, ख़ुश नहीं होगा कोई
लोग मौक़ा ढूँढते हैं, काट खाने के लिए

फलसफ़ा कोई नहीं है, और न मकसद कोई
लोग कुछ आते जहाँ में, हिनहिनाने के लिए

मिल रहा था भीख में, सिक्का मुझे सम्मान का
मैं नहीं तैयार झुककर उठाने के लिए

ज़िंदगी में ग़म बहुत हैं, हर कदम पर हादसे रोज
कुछ समय तो निकालो, मुस्कुराने के लिए

Jaun Elia - Ajab Tha Uski Dilzari Ka Andaz | जॉन एलिया - अजब था उसकी दिलज़ारी का अन्दाज़ | Ghazal

"जॉन एलिया - अजब था उसकी दिलज़ारी का अन्दाज़" हिंदी लिपि में 


अजब था उसकी दिलज़ारी का अन्दाज़, वो बरसों बाद जब मुझ से मिला है
भला मैं पूछता उससे तो कैसे, मताए-जां तुम्हारा नाम क्या है?

साल-हा-साल और एक लम्हा, कोई भी तो न इनमें बल आया
खुद ही एक दर पे मैंने दस्तक दी, खुद ही लड़का सा मैं निकल आया

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